आल्हा हमारी प्राचीन संस्कृति व वीरता की पहचान-मनीष पांडेय

रिपोर्ट-इम्तियाज़ खान
सहारा जीवन

बल्दीराय-आल्हा हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान व हमारे वीरता की निशानी है।आल्हा समेत कजरी,बिरहा,व फगुआ जैसी प्राचीन गायन शैली को संजोए रखना हमारी सबकी जिम्मेदारी है।वे कलाकार जो हमारी प्राचीन गायन शैली को जीवित रखे हैं उनका सम्मान करना चाहिए।उक्त बातें ब्राह्मण समाज व भगवान परशुराम सेवा संस्थान के संरक्षक डॉ मनीष पांडेय ने भवानीगढ़ में आयोजित आल्हा गायन कार्यक्रम में कही।
विदित हो कि आज बल्दीराय के भवानीगढ़ बाज़ार में भगवान परशुराम सेवा संस्थान द्वारा आल्हा का आयोजन किया गया।जिसमें आल्हा गायक अनिल कुमार तिवारी व उनकी टीम ने वीर रस से भरे आल्हागायन प्रस्तुत किया।उन्होंने अयोध्या  के राजा दशरथ व ऋषि विश्वामित्र के मध्य हुए संवाद व ऋषि द्वारा राम-लक्ष्मण को मांगने,ताड़का बध, रावण द्वारा सीता जी के हरण की सुंदर कथा का गायन आल्हा छंद में किया।अनिल तिवारी और उनकी टीम द्वारा भगवान परशुराम,राम व रावण युद्ध सहित कई ऐतिहासिक प्रसंगों पर आल्हा प्रस्तुत किया गया।इस मौके पर भगवान परशुराम सेवा संस्थान अध्यक्ष अमित पांडेय,चंद्रराज तिवारी,बृजनाथ सिंह,अनुराग पांडेय,कवि पीयूष प्रखर,विकास चौरसिया, विक्की पांडेय,वरिष्ठ कवि पुष्कर अग्रहरि,विनय मंगल सहित तमाम आल्हा प्रेमी मौजूद रहे।

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