दीक्षांत समारोह में शिक्षक की भूमिका में नजर आई राज्यपाल
रिपोर्ट-इम्तियाज खान
कुमारगंज/अयोध्या
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के 22 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति/ राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल एक शिक्षक की भूमिका में नजर आई। उन्होंने उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं से कहा कि माता पिता एवं अपने अभिभावकों कभी भी मत भूलना समय-समय पर उनकी देखभाल जरूर करते रहना, शांति से घर एवं समाज तथा देश में रहे , ऐसा कोई भी कार्य कतई मत करना कि जिससे उन्हें दंड मिले। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि मैं भी एक किसान की बेटी हूं। तंबाकू, गेहूं, जीरा निकालने से लेकर हर कृषि कार्य तक का काम मैंने किया जिसका परिणाम है कि आगे बढ़ी हूं। उन्होंने अपनी शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने वर्ष 1964 में बीएससी तथा 1966में एम एससी तथा एम एड करने के उपरांत गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि पद्मश्री का पुरस्कार किसानो को भी मिल रहा है। यह बहुत सम्मान की बात है। किसानों एवं कृषि को लेकर जो कार्य हो रहे हैं वह अत्यंत सराहनीय है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेटी बढ़ाओ बेटी पढ़ाओ के साथ-साथ किसानों की आय दोगुनी करने का एक संकल्प लिया गया है। जिसे कृषि वैज्ञानिकों के साथ साथ सबको मिलकर पूरा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज कृषि पशुपालन , मत्स्य कोई भी अछूता नही है । जिसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा न लिया हो। हमारे लिए गौरव की विषय है । किसान की बेटी होने के नाते मुझे भी खुशी हो रही है और किसान अपने आप आगे बढ़ रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की बात देश के प्रधानमंत्री करते हैं। उन्होंने मौजूद छात्र छात्राओं सहित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज 12 मार्च का दिन हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है , बीते 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के साबरमती तट से नमक आंदोलन को लेकर दांडी यात्रा आरंभ किया था , अंग्रेजों ने नमक पर कर लगाए जाने का ऐलान किया था जिसका विरोध करते हुए महात्मा गांधी ने एक सत्याग्रह छेड़ दिया था। 2022 में आजादी का 75 वर्ष होगा ऐसी घटनाओं को यादगार बनाना चाहिए । आजादी कैसे मिली थी , आतंकी घटनाएं देश में घटित हुई थी। आजादी के आंदोलन के चलते हर कोई पीछे नहीं था। सब ने अपना योगदान दिया था । दांडी यात्रा के बाद अंग्रेजों के अत्याचार को लेकर आजादी की चिंगारी जली थी। उत्तर प्रदेश एवं गुजरात सहित कई प्रांतों के लोगों ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी । आज देश के प्रधानमंत्री साबरमती के तट पर यादगार कार्यक्रम कर रहे हैं। ऐसे स्थलों पर जाने के बाद एक सबक ले कि पूरे भारत की सब जनता को एक अच्छी फसल दें। आजादी का उत्सव मनाने का कार्य शुरू हुआ है। 25 दिन के निर्धारित घोषित कार्यक्रम के तहत जब ऐसे कार्यक्रम आए तब आयोजनों को जरूर आयोजित करें ।आजाद भारत के लिए काम करने का प्राप्त अवसर कदापि ना छोड़ें । उन्होंने कहा कि आज संकल्प लेने का अवसर है । संकल्प मात्र संकल्प न रह जाए। जीवन में भी उतारे तभी भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि आज दीक्षांत समारोह के इस कार्यक्रम में परिषदीय विद्यालयों के बच्चे हमारे अतिथि हैं। उन्होंने गुजरात सरकार में वर्ष 2001 में बतौर शिक्षा मंत्री कार्यकाल को लेकर बताया कि साक्षरता सर्वे हुआ था जिसमें सर्वे का आंकड़ा आया था और एक हजार लड़कों के सापेक्ष मात्र 804 लड़कियों की संख्या थी जब भाव यह रहेगा कि हमें बेटा चाहिए तब गर्भ में ही पल रहे भ्रूण की हत्या करने के प्रयास होंगे। आंकड़ा आने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का आंदोलन शुरू किया , और अल्ट्रासोनोग्राफी पर पाबंदी लगाई । 2009 में यही आंकड़ा एक हजार के सापेक्ष 998 आया। विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी जब बेटा बेटी के विभेद के भाव कतई नहीं बनने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम क्या पढ़ रहे हैं इस पर जरूर सोचे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी करने पर पता चलता है कि प्रतिदिन प्रति मिनट एक बच्चे की मृत्यु होती है। इस विषय पर सुधार करना होगा। स्वयं को देखना होगा। अस्वस्थ माता-पिता अस्वस्थ बच्चे को ही जन्म देता है । उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा पर जमकर तंज कसा तथा अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मेरे द्वारा भी चंद दिन पूर्व उत्तर प्रदेश की जेलों वाराणसी ,लखनऊ ,उन्नाव का दौरा किया गया था जहां 350 से अधिक महिलाएं केवल दहेज हत्या को लेकर आजीवन कारावास से लेकर भारी सजा काट रही हैं। उन्होंने दहेज को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्र का भाव तो और ऊंचा हो जाता है और उसके माता पिता उसकी शादी में भारी दहेज की मांग करते हैं तथा उसे अच्छे दाम पर बेचते हैं यह तो उसी प्रकार से बेचने का काम हुआ जैसे एक जानवर और बकरी तथा भैंस को बेचने का काम किया जाए। उन्होंने दीक्षांत समारोह का मतलब बताते हुए कहा कि आप सब दीक्षित हुए हो और समाज में यह संदेश जाए कि हम दहेज नहीं लेंगे। कार्यक्रम में मौजूद कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियो पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति के परिश्रम का परिणाम है कि दीक्षांत समारोह से लेकर विश्वविद्यालय के शोध शिक्षा तथा प्रसार के कार्य पूरी प्रगति के साथ हो रहे हैं। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त छात्रों, विश्वविद्यालय कर्मियों सहित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद भी दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ आर सी अग्रवाल उप महानिदेशक कृषि शिक्षा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने कहा कि मैं उन शिक्षकों को बधाई देता हूं जिन्होंने विद्यार्थियों विद्यार्थियों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा ज्ञान कौशल और मानव मूल्य प्रदान करने के लिए अपना उत्कृष्ट योगदान दिया है विश्वविद्यालय के समक्ष उत्तर प्रदेश के कृषि आधारित क्षेत्रों में उत्थान की बड़ी जिम्मेदारी है उन्होंने कहा कि किसानों की जटिल समस्याओं के निराकरण हेतु नवीनतम अनुसंधान कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जाएगा तथा संबंधित प्रौद्योगिकी का प्रचार प्रसार कर कृषकों की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा स्नातकों को इस क्षेत्र में सतत विकास के लिए पेशेवर दक्षता की आवश्यकता है विश्वविद्यालय द्वारा रोजगार परक शिक्षा प्रदान कर विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर किया जा रहा है छात्रों को स्वयं करके सिखों के सिद्धांत पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि आपने संकट के समय धैर्य बनाए रखकर इन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि देश के विकास में कृषि क्षेत्र अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्तर प्रदेश देश के कुल अनाज उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करके देश की पोशाक आवश्यकताओं को पूरा करता है उन्होंने बढ़ती हुई जनसंख्या, क्षीण होता मृदा स्वास्थ्य असामयिक छिटपुट वर्षा बाढ़ जलवायु परिवर्तन शीलता ग्रीन हाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता घटता हुआ जल स्तर प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण भोजन के लिए उपभोक्ताओं की बदलती पसंद आज किसानों के हितों को सीधा प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने एकीकृत रोग एवं कीट प्रबंधन पोषक तत्व प्रबंधन वर्षा जल के संचयन एवं उपयोग करने की सरल एवं सुलभ तकनीकों को विकसित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि कृषि फसलों में विविधीकरण फसल चक्र एवं एक जिला एक उत्पाद मूल्य वर्धित उत्पाद जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पारंपरिक ज्ञान एवं विज्ञान में संबंध स्थापित कर हमें आगे बढ़ने की नसीहत दी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं को देखते हुए विशेष रूप से किसानों को आगे आने का आवाहन किया और कृषि विकास दर में प्रगति के लिए प्रधानमंत्री ने पूर्वी राज्यों में दूसरी हरित क्रांति की कल्पना को बताया जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा चार रंगों के सर ऊर्जा कृषि उत्पादकता तथा सफेद दूध उत्पादन का और नीला जल संसाधनों और ऊर्जा का उपयोग के साथ चतुरंगी क्रांतियों का शुभारंभ करते हुए किसानों की आय दोगुनी किए जाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और उत्पादक पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने नए कृषि अधिनियम 2020 के लागू होने पर किसानों के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव और देश में एक नई कृषि युग का शुभारंभ होने की कामना व्यक्त करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति भी छात्रों के भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक की और से मेरे द्वारा विशेष प्रयास करके देश के 4 विश्वविद्यालयों में उक्त आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय भी शामिल है। 5 करोड़ रुपए तथा एकेडमिक प्रयोजन हेतु दो करोड़ कृपया मेरे द्वारा विशेष प्रयास करके दिलाया जा चुका है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य मंत्री लाखन सिंह राजपूत ने उपाधि प्राप्त करता विद्यार्थियों के सुख में भविष्य की कामना करते हुए उनके अभिभावकों को भी धन्यवाद दिया और बताया कि देश के विकास में कृषि का 21.20 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को लेकर कहा कि समूचे देश में उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जिसने जलवायु प्राधिकरण का गठन किया है।
उन्होंने जैविक खेती की आवश्यकता जताई और बताया कि सरकार द्वारा जैविक खेती को लेकर प्रोत्साहन एवं अनुदान दे रही है उन्होंने किसान सम्मान निधि सहित किसानों के कल्याण हेतु चलाई जा रही। सरकार की विभिन्न योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि आत्मनिर्भर भारत तभी बनेगा जब सभी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह ने अपने कार्यकाल में कृषि विश्वविद्यालय में हुई उपलब्धियों को एक-एक करके गिनाया और बताया कि विश्वविद्यालय में काफी दिनों से लंबित कर्मचारियों के विनियमितीकरण सहित विश्वविद्यालय द्वारा अपने स्रोतों से वित्तीय वर्ष 2019 - 20 में 16.43 करोड़ रुपए अर्जित किए जाने की बात बताई। कुलपति श्री सिंह ने बताया कि वर्तमान में कृषि विश्वविद्यालय के अधीन पूर्वांचल के 26 जनपदों में कृषि के समग्र विकास को सुनिश्चित करने हेतु 25 कृषि विज्ञान केंद्र एवं चार कृषि ज्ञान केंद्र तथा अच्छे फसल अनुसंधान केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। कुलपति ने विश्वविद्यालय की स्थापना, शिक्षा, प्रसार, प्रशासनिक प्रबंधन, वित्तीय संसाधन एवं प्रबंधन सहित अपनी प्राथमिकताएं एवं प्रयास को विस्तार से गिनाया। कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ पी के सिंह ने उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को आशीर्वचन देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामना की तथा अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार जताया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष सहित डीआईजी दीपक कुमार एवं छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
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