कृषि वैज्ञानिकों ने क्षेत्र भ्रमण किसानों से की मुलाकात,बताया सुरक्षित खेती का उपाय
रिपोर्ट-इम्तियाज़ खान
सुल्तानपुर-आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन, सुल्तानपुर द्वितीय के वैज्ञानिकों द्वारा बहुुबरा, अगई एवं अन्य गांवों के कृषकों के प्रक्षेत्र पर भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान सरसों, आलू, मटर, मसूर, गेहूं आदि फसलों का किसानों के फसल का निरीक्षण कर रोग - कीट, खरपतवार एवम् पाला नियंत्रण हेतु जैविक एवम् रासायनिक नियंत्रण के उपाय साझा किए गए। वैज्ञानिकों द्वारा अनुमान लगाया गया कि जनवरी के प्रथम सप्ताह से मौसम में बदलाव हो सकता है जिससे रोग, कीट एवम् पाले की समस्या बढ़ सकती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि पाले से बचने के लिए सभी फसलों में सिंचाई के साथ आवश्यक नमी बनाए रखे तथा उस दौरान यूरिया का भुरकाव फसलों में करें। सब्जियों एवं फल वृक्षों में मल्च का प्रयोग करें, धुआं अथवा गंधक अम्ल या थाओ यूरिया का भी प्रयोग कर सकते हैं।
गेहूं की फसल में सकरी एवं चौड़ी पत्ती के खरपतवार हेतु टोटल नामक दवा जिनमें सल्फो सल्फूरान एवम् मेट सल्फुरान एक साथ पाया जाता है, की 16 ग्राम दवा प्रति एकड़ की दर से 200 से 250 लीटर पानी में छिड़काव करें।
छिड़काव बुवाई के 30 से 35 दिन के अंदर अवश्य कर दे। सरसों की फसल में रोग नियंत्रण हेतु गंधक का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से एवं मैनकोज़ेब का 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करें। आलू, टमाटर, मिर्च आदि में झुलसा के बचाव हेतु मैनकोज़ेब 2.5 ग्राम अथवा रिडोमिल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
सब्जियों तथा अन्य फसलों में जैविक नियंत्रण हेतु फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप, प्रकाश प्रपंच एवं नीम युक्त रसायनों का प्रयोग भी कर सकते हैं। गोमूत्र से निर्मित जैविक रसायनों का भी प्रयोग करके पाल एवं अन्य बीमारियों से फसल को बचाया जा सकता है। भ्रमण के दौरान गांव के प्रगतिशील किसान श्री देवराज, श्री दीपू, श्री जमुना प्रसाद, श्री राम खुशहाल मिश्र, परशुराम यादव, शिव सागर और कृषक महिला कृपाला देवी, रेनू देवी, विद्या देवी, दर्शना देवी, आदि लोग उपस्थित रहे।
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