भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष बबिता अखिलेश तिवारी ने आज केरोना
(कोविड-19)महामारी से
बचाव के लिए मास्क वितरित किया।और कहा कि सोशल डिस्टेंस बहुत जरूरी है। कुड़वार ब्लॉक के कुड़वार, उतमानपुर, भगवान पुर और भदहरा में घर घर जाकर 500 मास्क वितरित किया।
इम्तियाज़ खान सुल्तानपुर--डॉ. मोहम्मद आजम अंसारी पिछले 8 वर्षों से दम्मम विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। डॉ आज़म को लगातार दूसरे वर्ष (2021 और 2022) विश्व शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में सूचीबद्ध किया गया है (जो प्रकाशन रिकॉर्ड और उद्धरणों के आधार पर सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया है)। यह डेटाबेस स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के वैज्ञानिकों ने एल्सेवियर के सहयोग से स्कोपस डेटा का उपयोग करके तैयार किया है। डॉ आजम एक बहुत ही छोटे से गांव खानोहा-पारा बाजार से आते हैं। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त की और मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध दवा प्रतिरोधी बायोफिल्म बनाने वाले बैक्टीरिया और कवक के कारण होने वाले संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए मेडिकल मिक्रोबियोलॉजी और नैनोमेडिसिन पर केंद्रित है। उन्होंने न सिर्फ अपने जिले सुल्तानपुर का नाम रोशन किया है बल्कि अपने गांव खनोहा पारा बाजार और अपने टीचरों का भी नाम रोशन किया है इस पूरी यात्रा में मेरा साथ देन...
रिपोर्ट-इम्तियाज़ खान मुस्लिम बाहुल्य इसौली सीट पर इस बार भी भाजपा का कमल खिलते-खिलते रह गया। बीजेपी प्रत्याशी ओमप्रकाश बजरंगी री काउंटिंग में सपा प्रत्याशी व पूर्व सांसद ताहिर खान से 269 वोट से हार गए। इससे पहले मोदी लहर में भी बजरंगी को री काउंटिंग में ही हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में कहा जा सकता है कि री काउंटिंग अब उनका मुकद्दर बन गया है। लेट में उतारा था सपा-भाजपा ने प्रत्याशी बता दें कि इसौली सीट भाजपा और सपा दोनों ही के लिए सुल्तानपुर की इसौली सीट नाक का सवाल थी। सपा यहां जीत की हैट्रिक लगाने के लिए बेताब तो भाजपा कमल खिलाने के लिए भरसक प्रयास में थी। हालांकि दोनों ही दलों ने यहां प्रत्याशी उतारने में देर की थी। भाजपा ने जहां मोदी लहर के रनर ओमप्रकाश पांडे बजरंगी पर दांव खेला तो सपा ने दो बार के सीटिंग विधायक अबरार अहमद का टिकट काट कर पूर्व सांसद मोहम्मद ताहिर खान को चेहरा बनाया। ताहिर को बड़े पैमाने पर भीतरघात का सामना करना पड़ा। जिसका असर नतीजों पर पड़ा है यह साफ है। बैलेट पेपर की गिनती के बाद सपा प्रत्याशी जीते गौरतलब रहे कि सुल्तानपुर की पांच सीटों पर कल आए नतीजो...
इम्तियाज़ खान राज खन्ना प्रधानमंत्री का पद संभालने के सिर्फ सात महीने के भीतर लाल बहादुर शास्त्री के सामने घरेलू मोर्चे के साथ ही सीमाओं की रक्षा की दोहरी चुनौती थी। कच्छ के रण में पाकिस्तान ने मोर्चा खोल दिया। फरवरी 1965 में गुजरात पुलिस के गश्ती दस्ते ने सीमा के 2.4 कि.मी. भीतर 32 किलो मीटर लम्बी एक पगडंडी देखी। पाकिस्तान ने इसे भारी वाहनों के लिए बनाया था। उसका एयरपोर्ट भी पास था। सामरिक दृष्टि से वह बेहतर स्थिति में था। अमेरिका उसे मदद कर रहा था। सोवियत संघ भी पाकिस्तान से संबंध सुधारने की राह पर था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने उन्हें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए राजी कर लिया। यह भारी रियायत थी। पर युद्ध टालने की शर्त थी। बाद में 18 फरवरी 1968 के फैसले में कच्छ के रण पर भारत के पूर्ण अधिकार को नही माना गया। कुल 3500 वर्ग मील के क्षेत्र में 300 वर्ग मील इलाका पाकिस्तान के हिस्से में गया। पर शांति की यह कोशिश निरर्थक थी। कश्मीर के मोर्चे पर पाकिस्तानी गोलीबारी बढ़ती गई। बड़े पैमाने पर पाक सेना से प्रशिक्षि...
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